मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राजस्व में भारी गिरावट की वजह से राज्यों की वित्तीय स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। वित्तीय स्थिति को देखते हुए राजस्थान सरकार को राज्य कर्मियों के मार्च माह के वेतन को आंशिक रूप से स्थगित करने का मुश्किल फैसला लेना पड़ा। ऐसे में राज्यों की आर्थिक स्थिति समझते हुए केंद्र सरकार की ओर से अत्यावश्यक कदम उठाने चाहिए।
गहलोत ने पत्र में लिखा है कि देश के सभी राज्यों को 1 लाख करोड़ का अनुदान शामिल करते हुए आर्थिक पैकेज की घोषणा शीघ्र की जानी चाहिए। आरबीआई ने हाल ही में वेज एंड मीन्स एडवान्स में 30 प्रतिशत की सीमा बढ़ाई है, लेकिन संकटकाल को देखते हुए राज्य सरकारों को ब्याज मुक्त वेज एण्ड मीन्स एडवान्स की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे कोविड-19 महामारी से ज्यादा प्रभावी तरीके से निपट सकें।
डाॅक्टरों के लिए पीपीई एवं टेस्टिंग किट का समुचित इंतजाम हो
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कोविड-19 वायरस के प्रसार की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए केंद्र से परीक्षण सुविधा में तेजी से वृद्धि करने और डाॅक्टरों तथा चिकित्सा कर्मचारियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों एवं टेस्टिंग किट का युद्ध स्तर पर आयात कर कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या के आधार पर इसका वितरण करने का आग्रह किया। केंद्र के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से वेंटिलेटर का उचित प्रमाणीकरण कर उसका मूल्य निर्धारण किया जाए ताकि बाजार में आए कम लागत वाले प्रभावी वेंटिलेटर की खरीद में आसानी हो।
3 माह का ब्याज मुक्त मोरेटोरियम मिले
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक एवं केन्द्र के अधीन अन्य वित्तीय संस्थानों के समस्त ऋण जो आगामी समय में देय हैं, उनके भुगतान का पुनर्निधारण करते हुए ब्याज मुक्त आधार पर कम से कम 3 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराए। साथ ही भारत सरकार के स्तर पर ऋण लेकर राज्यों के विकास के लिए उपलब्ध करवाया जाए।
मनरेगा मजदूरों को अग्रिम भुगतान हो
सीएम ने मनरेगा के पंजीकृत और सक्रिय मजदूरों को 21 दिन के अग्रिम वेतन भुगतान पर विचार करने का भी आग्रह किया। राज्य सरकारों को भरोसे में लेकर संघवाद के मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। कोविड-19 महामारी से समन्वित एवं ऊर्जावान तरीके से निपटने के लिए संघवाद की भावना की आवश्यकता पर जोर दिया।